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Abhishek
Tuesday, October 26, 2010
न
जाने
अश्क
से
आँखों
मैं
क्यों
है
आये
हुए
,
गुजर
गया
आज़माना
तुझे
भुलाये
हुए
................
जब
मैं
चलू
तो
साया
भी
अपना
साथ
न
से
,
जब
तुम
चलो
ज़मी
चले
आसमा
साथ
दे
,
हम
तुम
मिले
न
थे
तो
जुदाई
का
था
मलाल
,
अब
ये
मलाल
है
की
तम्मना
निकल
गयी
...................
दिल वो नगर नहीं जो फिर आबाद हो सके ,
पछताओगे तुम फिर ये बस्ती उजाड़ के............
तम्मना है की मिलू तुझ से बस अपनी मौत से पहले ,
मिले फिर मौत कुछ ऐसे की तेरे पहलू मैं अपना दम निकले.
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